JEEVAN SAAR


Since 1985, whenever I got an opportunity to read virtuous thoughts, those words and sentences have been recorded by me in Jeevan Saar.
Till date, five volumes of Jeevan Saar have been completed containing benign thoughts. The work is on-going.
I bow at the feet of revered Maa Saraswati, my parents, and teachers. I seek their blessings in my effort so that this compilation work goes on unhindered.
Sadar Jai Jinendra
Nirmal Gangwal

यह संकलन मेरे द्वारा वर्ष 1985 से जारी है, जब कभी अच्छे विचारों को पढ़कर मुझे संकलन का सौभाग्य मिलता है, उन शब्दों और वाक्यों को जीवन सार डायरी में लिखता हूँ ।
आज तक इस जीवन सार संकलन की पाँच डायरी पूर्ण हो चुकी है। वर्तमान में भी यह कार्य जारी है।
माँ सरस्वती! आापके श्री चरणों में वंदन। माता-पिता, गुरूदेव के चरणों में कोटि-कोटि वंदन। यह संकलन का मार्ग मिलता रहे एवं मेरा जीवन ऐसा हो इन्हीं भावनाओं के साथ।
सादर जय जिनेन्द्र
निर्मल गंगवाल



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JEEVAN SAAR-1

JEEVAN SAAR-2

JEEVAN SAAR-3

JEEVAN SAAR-4

JEEVAN SAAR-5